नई दिल्ली। खेल अर्थव्यवस्था में क्रिकेट राजस्व प्रधान बना हुआ है। वैश्विक दो अरब डॉलर जैसे आँकड़े चर्चा में आते हैं, पर उन्हें स्रोत जाँच के बाद ही उद्धृत करना चाहिए।
होकी, कबड्डी और एथलेटिक्स को भी प्रायोजन की हवा चाहिए। स्कूल स्तर पर खेल विविधता भविष्य की प्रतिभा तय करती है; केवल एक खेल पर निर्भरता विकल्प सीमित करती है।
भीलवाड़ा में बहु-खेल अवसंरचना निवेश लंबी अवधि का लाभ है। नगर निकाय और उद्योग सीएसआर से सार्वजनिक मैदान सुधार सकते हैं।
आँकड़े आधिकारिक अध्ययन से लें और अटकलबाजी से बचें। अतिरंजित दावे नीति और निवेश दोनों को बिगाड़ते हैं।
स्थानीय जोड़ के बिना बड़ी खेल अर्थव्यवस्था केवल आँकड़ा रह जाती है—युवा मैदान तक पहुँच ही असली परीक्षा है।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क