नई दिल्ली। महिला क्रिकेट की दृश्यता और लीग संरचना पिछले वर्षों में बढ़ी है। फिर भी जिला स्तर पर समान अभ्यास समय और उपकरण उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।
भीलवाड़ा स्कूलों में लड़कियों के लिए नेट स्लॉट, सुरक्षित अभ्यास समय और बुनियादी उपकरण जरूरी हैं। अभिभावक समर्थन निर्णायक भूमिका निभाता है।
प्रायोजक महिला टीम श्रेणी अपनाएँ। यात्रा सहायता और कोचिंग से प्रतिभा आगे बढ़ती है। आधिकारिक चयन प्रक्रिया पारदर्शी रखनी चाहिए।
अफवाह और सिफारिश का खेल युवाओं का विश्वास तोड़ता है। समान अवसर नारा नहीं, समयसारिणी और बजट में दिखना चाहिए।
राजस्थान और भीलवाड़ा की लड़कियाँ तभी आगे बढ़ेंगी जब सुविधा लड़कों के बराबर सुरक्षित उपलब्ध हो।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क