राजस्थान। खरीफ फसल में सिंचाई की समयबद्धता आय की कुंजी है। नमी की जाँच, कीट निगरानी तथा नहर या ट्यूबवेल शेड्यूल को एक साथ मिलाकर योजना बनानी चाहिए।
अधिक बारिश वाले दिनों में जल निकासी पर ध्यान दें; कम बारिश में मल्चिंग और सूक्ष्म सिंचाई उपयोगी हो सकती है। मौसम अलर्ट नियमित देखें। मंडी पहुँच और परिवहन लागत घटाने में एफपीओ मददगार सिद्ध हो सकते हैं।
महिला किसानों ने सरल भाषा में प्रशिक्षण की माँग की है। योजनाओं की पात्रता आधिकारिक पोर्टल से ही जाँचें; दलालों के झांसे में न आएँ।
खेती को शहर की थाली और कपास मूल्य श्रृंखला से जोड़कर देखना चाहिए। भीलवाड़ा जैसे औद्योगिक जिले में गाँव-शहर का यह रिश्ता और साफ दिखता है।
भीलवाड़ा केसरी कृषि सलाह को सम्मान के साथ देगा—उपदेश की भाषा में नहीं, सहयोग की भाषा में।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क