उदयपुर। मेवाड़ राजमाता विजय राज की विदाई और सम्मान लोक-स्मृति की चर्चा में रही। भीलवाड़ा केसरी सांस्कृतिक संवेदना से लिख रहा है—राजनीतिक रंग से दूर।
मेवाड़ की परंपरा और जन आस्था इन स्मृतियों से जुड़ी रही है। शांतिपूर्ण सम्मान में संयम अपनाना ही उपयुक्त आचरण है। पर्यटन नगर में धरोहर संरक्षण की याद ये अवसर दिलाते हैं।
भीलवाड़ा पाठकों के लिए यह राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता का संदर्भ है। अफवाह और सनसनी से दूरी जरूरी है।
शांति और सम्मान बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है। अनावश्यक भीड़ और उत्तेजक टिप्पणियों से बचें।
डेस्क केवल गरिमापूर्ण, सत्यापित उल्लेख ही प्रकाशित करेगा।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क