खरीफ सलाह तब काम आए जब किसान की बात भी सुनी जाए। मंडी पारदर्शिता और सिंचाई समय किसान अधिकार जैसे मुद्दे हैं।
शहर की थाली गाँव के पसीने से भरती है—यह विस्मृत न हो। उपदेश की भाषा नहीं, सहयोग की भाषा चाहिए।
केसरी कृषि आवाज़ को स्थान देता रहेगा। योजना पोर्टल सरल हों; दलाली का बोझ घटे। महिला किसान प्रशिक्षण से वंचित न रहें।
सलाह सम्मान के साथ दी जाए तो अपनाई जाती है। डर या उपेक्षा से खेती नहीं सुधरती।
सम्मानित किसान ही सुरक्षित खाद्य भविष्य है—भीलवाड़ा और राजस्थान दोनों के लिए।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क
विनोद नरनिवाल
संपादक, भीलवाड़ा केसरी