महाशक्ति संवाद में भारत आत्मविश्वास रखे, पर निर्यातक सावधानी न छोड़ें। भीलवाड़ा जैसे निर्यात जिले के लिए यह संयम व्यावहारिक जरूरत है। अटकल पर कारखाना न रोकें; योजना बी रखें।
स्थानीय उद्योग को नीति भाषा सरल में मिले। भीलवाड़ा टेक्सटाइल के लिए यह व्यावहारिक जरूरत है।
केसरी संयम और तैयारी दोनों का समर्थन करता है। भय और लापरवाही दोनों घातक हैं।
हेजिंग और बाजार विविधीकरण समझदारी है, पलायन नहीं। बैंक और उद्योग मंडल साथ आएँ।
सावधानी से बना व्यापारी ही लंबे संकट पार करता है—यह पाठ आज सबसे प्रासंगिक है।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क
विनोद नरनिवाल
संपादक, भीलवाड़ा केसरी