करोड़ों के ब्रांड सौदे शानदार हैं, पर जिला नेट टूटे रहें तो विकास अधूरा है। व्यावसायीकरण बुरा नहीं; दिशाहीनता बुरी है।
सीएसआर को पिच, प्रकाश और सुरक्षा तक लाएँ। प्रायोजन की चमक युवा के जूते और गेंद तक पहुँचे तभी सार्थक है।
केसरी खेल को सिर्फ मनोरंजन नहीं, युवा भविष्य मानता है। राजस्थान और भीलवाड़ा की प्रतिभा तभी खिलेगी जब सुविधा समान हो।
बड़ा सौदा तभी पूरा होता है जब छोटा मैदान भी सुधरे। प्रशासन और प्रायोजक दोनों की भूमिका है।
खेल अर्थव्यवस्था का असली चेहरा वार्ड के मैदान पर दिखना चाहिए, केवल प्रेस नोट में नहीं।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क
विनोद नरनिवाल
संपादक, भीलवाड़ा केसरी