भीलवाड़ा। कच्चा माल और भुगतान शुल्क बढ़ने पर दुकानदार कीमत संशोधन करते हैं। पारदर्शी लेबलिंग ही ग्राहक विश्वास बचाती है।
एमडीआर या अन्य लागत को छुपाकर बिल बढ़ाना गलत संदेश देता है। रसीद में स्पष्टता रखें और कारण ईमानदारी से बताएँ।
उपभोक्ता तुलना खरीद अपनाएँ। बाजार समिति संवाद बढ़ाए ताकि अफवाह और मनमानी दोनों घटे।
नैतिक व्यापार लंबी दौड़ में अधिक टिकाऊ होता है। अल्पकालिक मार्जिन से साख नहीं बचती।
भीलवाड़ा केसरी पारदर्शिता का पक्षधर है। लागत दबाव हो तो भी ग्राहक के साथ साफ संवाद ही सही मार्ग है।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क