भीलवाड़ा। थोक कपड़ा बाजार में बड़े बिल यूपीआई या आरटीजीएस से होते हैं। एमडीआर परत मार्जिन पर दबाव डाल सकती है—यह व्यापारियों की प्रमुख चिंता है।
व्यापार संघ प्रशिक्षण शिविर लगाएँ—रसीद, रिफंड और विवाद निपटान पर। नकद की ओर पूरी तरह लौटना अव्यावहारिक है; संतुलन चाहिए।
बैंक संबंध अधिकारी से श्रेणी छूट जाँचें। गलत क्यूआर श्रेणी से नुकसान और अनुपालन जोखिम दोनों बढ़ते हैं।
डेस्क बाजार राय दर्ज करता रहेगा। पारदर्शी बातचीत से अफवाह घटती है।
टेक्सटाइल सिटी की प्रतिस्पर्धा डिजिटल दक्षता से भी जुड़ी है—लागत समझकर आगे बढ़ना ही सही रास्ता है।
— भीलवाड़ा केसरी डेस्क